*हड़ताल के 22वें दिन*
*जशपुर के 800 से अधिक एनएचएम कर्मचारियों ने दिया सामूहिक इस्तीफा*
*शासन-कर्मचारी टकराव गहराया*

प्रदेश में मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बीच राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के संविदा कर्मचारी पिछले 22 दिनों से अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे हैं। शासन द्वारा कोई ठोस पहल न होने और दमनात्मक कार्रवाई से नाराज़ होकर जशपुर जिले के आठों ब्लॉकों और जिला कार्यालय के 800 से अधिक एनएचएम कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया।
*काले कपड़ों और नगाड़ों के साथ रैली*
सोमवार को कर्मचारी काले कपड़े पहनकर ढोल-नगाड़ों और पटाखों के बीच नारे लगाते हुए रैली निकालकर जिला कार्यालय पहुंचे। यहां मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सामूहिक इस्तीफा सौंपा गया। कर्मचारियों ने साफ कहा कि वे शासन की किसी भी दमनकारी नीति से डरने वाले नहीं हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन और उग्र रूप लेगा।
*कर्मचारियों की मुख्य 10 मांगें*
संविलियन, जॉब सुरक्षा, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, लंबित 27% वेतन वृद्धि, ग्रेड पे निर्धारण, अनुकंपा नियुक्ति, सवैतनिक अवकाश, स्थानांतरण नीति, न्यूनतम 10 लाख का चिकित्सा बीमा और कार्यमूल्यांकन पद्धति में सुधार प्रमुख मांगों में शामिल हैं।
संघ का कहना है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान “मोदी की गारंटी” के तहत इन समस्याओं का निराकरण करने का वादा किया था, लेकिन 20 माह बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ।
*शासन की सख्ती, कर्मचारी अड़े*
हड़ताल के दौरान शासन ने 29 जिला और राज्य स्तरीय पदाधिकारियों को सेवा से पृथक कर दिया और बाकी कर्मचारियों को 24 घंटे में ड्यूटी ज्वाइन करने की चेतावनी दी। इसके विरोध में कर्मचारियों ने सामूहिक त्यागपत्र दिया।
संघ का कहना है कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है, इसलिए केंद्र की अनुमति का हवाला देकर राज्य सरकार जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।
*जनता परेशान, संवाद की कमी*
लंबे आंदोलन से टीकाकरण, प्रसव कार्य, टीबी-मलेरिया जांच, पोषण पुनर्वास केंद्र, नवजात शिशु स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल-आंगनबाड़ी में स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सेवाएं ठप हो गई हैं।
संघ ने शासन से अपील की है कि वह तत्काल संवाद कर समाधान निकाले, अन्यथा आंदोलन और तेज होगा।










