*सूर्य के उपासना का महापर्व छठ, देवी के रूप में पूजे जाते है भगवान सूर्य*
*मंगलवार को नहाय खाय से शुरू हुआ व्रत*
*बुधवार शाम को खरना पूजा में खीर का प्रसाद किया जाएगा ग्रहण*

जशपुर। जिले भर में छठ पूजा का पर्व उत्साह के साथ शुरू हो गया है। इसके लिए आवश्यक पूजन समाग्रियों की बिक्री शुरू हो गई है। गन्ना व अन्य मौसमी फलों की दुकानें सज चुकी हैं। मंगलवार को छठ पूजा के व्रतियों ने नहाय खाय के साथ व्रत का शुरूआत किया किया।
बुधवार की शाम को खरना का खीर का प्रसाद श्रद्धालुओं के द्वारा ग्रहण किया जाएगा और 7 नवम्बर को सूर्य देव को पहला अध्र्य दिया जाएगा। छठ घाटों को रंगीन विद्युत झालरों से सजाया जा रहा है। छठ पूजा की धूम अभी पूरे चार दिन चलेगी। छठ को लेकर जशपुर सहित जिले भर में भारी उत्साह और धार्मिक श्रद्धा का माहौल देखा जा रहा है।
जशपुर अंचल में मंगलवार को नहाय खाय के बाद सूर्यदेव की अराधना का महापर्व पूरे उत्साह के साथ शुरू हो गया है। व्रत धारण करने वाले लोगों ने शनिवार शाम को अपने ईष्टमित्रों व परिजनो को खीर प्रसाद ग्रहण करने के लिए बकायदा आमंत्रित किया है। खरना पूजा में मिट्टी से सिर धोकर व्रती दिन भर निर्जला व्रत रहेंगे, और शनिवार की शाम को बिना शक्कर से गुड़ की खीर एवं पूड़ी का प्रसाद बनाया जाएगा। रात में चंद्र दर्शन के बाद छठ मइया के व्रतियों ने उस प्रसाद को ग्रहण किया जाएगा। इस व्रत को रहने वाले लोग चार दिनो तक संयम-नियम का पालन करते हैं व खाना खाते समय भी बातचीत निषेध रहता है। भक्त बताते हैं कि छठ मइया के नियमों के विरूद्ध रहकर पूजा अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी नही होती व पूजा फलित नहीं होता इसलिए इस व्रत को बड़ी श्रद्धा के साथ पवित्र नियमों का ख्याल रखते हुए करते हैं।

*देवी के रूप में पूजे जाएंगे भगवान सूर्य*
सूर्य को षष्ठी तिथि के दिन मईया अर्थात देवी के रूप में पूजा करने कर पंरपरा है। इस बारे में मान्यता है कि किसी समय परशुराम के पिता जमदगनी ऋषि जगंल में भ्रमण कर रहे थे। उस समय सूर्य की तपन तेज थी। उसी दौरान परशुराम की मां रेणुका तुलसी चबूतरा में पूजा कर रही थी। वह पसीने से लथपथ थी। यह देखकर जमदगनी ऋषि को सूर्य पर क्रोध आ गया। उन्होंने सूर्य को श्राप देते हुए कहा कि तुम भी एक दिन के लिए स्त्री बन कर पूजे जाओगे, तब तुम्हे स्त्रियों का कष्ट समझ में आएगा। तभी से ऐसी मान्यता है कि सूर्य उस दिन छठ मईया के रूप में पूजे जाते है। शेष दिवस वे सूर्य देव के रूप में पूजे जाते हैं।
*पूजा समाग्रियों व फलों से सजा बाजार*

शहर में छठ महापर्व को देखते हुए पूजन सामग्रियों व मौसमी फलों का बाजार सज गया है। छठ में प्रयोग होने वाले विशेष रूप से गन्ना, ढोब, कच्चा नारियल, कच्चा सिंघाड़ा, केले की कांधी, शकरकंद, कच्ची हल्दी सहित अन्य मौसमी फलों की विशेष व्यवस्था की गई है। इसके अलावा पर्व को लेकर दऊरा, सुपा एवं अन्य पूजन समाग्रियों की खूब बिक्री हुई। व्रती के परिजन साप्ताहिक बाजार रविवार से ही पूजन सामग्रियों को एकत्र करने में लगे हुए थे।










