*झाड़-फूंक और देशी उपचार से बिगड़ रहे फ्रैक्चर के मामले, दो मरीज दिव्यांग होने से बचे, मासूम के हाथ पर संकट*
*जिला अस्पताल में लगातार पहुंच रहे गंभीर मामले, हड्डी रोग विशेषज्ञों ने समय पर ऑपरेशन कर बचाई दो मरीजों की जिंदगी और हाथ, तीसरे बच्चे का इलाज चुनौतीपूर्ण*



आदिवासी बहुल जशपुर जिले में हड्डी टूटने के बाद आधुनिक चिकित्सा की बजाय देशी उपचार और झाड़-फूंक पर भरोसा लोगों के लिए भारी पड़ रहा है। गलत तरीके से किए गए उपचार के कारण मरीज न केवल गंभीर जटिलताओं का शिकार हो रहे हैं, बल्कि कई मामलों में दिव्यांगता का खतरा भी पैदा हो रहा है। जिला चिकित्सालय में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। चिकित्सकों के प्रयास से दो मरीजों को स्थायी दिव्यांगता से बचा लिया गया है, जबकि एक 10 वर्षीय मासूम के हाथ को बचाना अब डॉक्टरों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
राजा देवशरण जिला चिकित्सालय की हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव ने बताया कि झारखंड सीमा से लगे कुंद्रा-चटकपुर गांव निवासी 40 वर्षीय किशना राम के दाहिने हाथ की हड्डी कंधे और कोहनी के बीच से टूट गई थी। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने के बजाय एक वैद्य के पास ले गए, जहां जड़ी-बूटी का लेप लगाकर और अनुमान के आधार पर हड्डी बैठाकर पट्टी बांध दी गई। इससे स्थिति और बिगड़ गई। दर्द बढ़ने और हाथ की असामान्य स्थिति होने पर जिला अस्पताल लाया गया। जांच में पता चला कि हड्डी सही तरीके से नहीं जुड़ पाई थी और दोनों हड्डियों के बीच मांस भर गया था। चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर हड्डी को सही स्थिति में स्थापित किया।
इसी तरह 10 वर्षीय छात्र प्रदीप मांझी के दाहिने हाथ में फ्रैक्चर होने के बाद भी परिजन उसे पारंपरिक उपचार के लिए ले गए। कुछ दिनों बाद हाथ में तेज दर्द और सूजन होने पर जिला चिकित्सालय लाया गया। जांच में हाथ में मवाद भरने की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने सफल ऑपरेशन कर हड्डी को सही स्थान पर बैठाया। उपचार के बाद दोनों मरीजों और उनके परिजनों ने जिला अस्पताल के चिकित्सकों का आभार जताया।
डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि गुरुवार को भी ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया। शहर से लगे ग्राम गढ़ा गम्हरिया के पंडरीपानी निवासी 10 वर्षीय बालक करीब तीन माह पहले खेलते समय गिरकर घायल हो गया था। हाथ की हड्डी टूटने पर परिजन उसे भी देशी उपचार के लिए ले गए। वैद्य द्वारा जड़ी-बूटी लगाकर कसकर पट्टी बांध देने से हाथ में रक्त प्रवाह बाधित हो गया, जिससे मांसपेशियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। अब चिकित्सकों के सामने बच्चे के हाथ को बचाने की बड़ी चुनौती है।
डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव ने लोगों से अपील की कि किसी भी दुर्घटना में हड्डी टूटने पर देशी उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर उचित उपचार मिलने से गंभीर जटिलताओं और स्थायी दिव्यांगता से बचा जा सकता है।










