*जशपुर के आदिवासी समुदाय ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को सौंपा चार सूत्रीय मांगपत्र*


जशपुर अनुसूचित क्षेत्र के आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा को चार सूत्रीय मांगपत्र सौंपकर अनुसूचित क्षेत्रों से जुड़े संवैधानिक एवं भूमि अधिकार संबंधी मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
प्रतिनिधियों ने अपने ज्ञापन में कहा कि संविधान के प्रावधानों के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में गठित नगरपालिका, नगर निगम एवं नगर पंचायतों को समाप्त किया जाए। उनका तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 243ZC के अनुसार नगरपालिकाओं से संबंधित प्रावधान अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू नहीं होते।
ज्ञापन में दूसरी प्रमुख मांग यह रखी गई कि अनुसूचित क्षेत्रों में शासकीय भूमि के आबंटन एवं अतिक्रमित भूमि के व्यवस्थापन की योजनाएं केवल अनुसूचित जनजाति के लोगों के लिए लागू की जाएं तथा गैर-आदिवासियों के लिए ऐसी योजनाओं पर रोक लगाई जाए। प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे अनुसूचित क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय एवं सामाजिक संरचना प्रभावित हो रही है।
तीसरी मांग में संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल की शक्तियों का उपयोग करते हुए अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 को अनुसूचित क्षेत्रों में आवश्यक अपवादों एवं उपांतरणों के साथ लागू करने की मांग की गई है। प्रतिनिधियों ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में वन अधिकारों की मान्यता केवल अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों तक सीमित की जाए तथा “अन्य परम्परागत वन निवासी” संबंधी प्रावधान को इन क्षेत्रों में लागू नहीं किया जाए।
चौथी मांग में पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित शरणार्थियों को पुनर्वास के तहत आवंटित भूमि के गैर-आदिवासियों को अंतरण पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि भूमि अंतरण की अनुमति दी जाए तो वह केवल अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के पक्ष में ही हो।
आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग से अनुरोध किया है कि इन मांगों को केंद्र एवं राज्य सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर उनके निराकरण के लिए आवश्यक पहल की जाए।










