*आपदा में अवसर का लाभ*
*किसानों के हक का डीजल रात के अंधेरे में ₹150 लीटर खपाया* *OM फ्यूल्स’ पेट्रोल पंप पर कालाबाजारी का बड़ा आरोप; सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद, SDM ने दिए जांच के आदेश*

कोतबा,जशपुरनगर। एक तरफ जहां चिलचिलाती धूप और संकट के बीच किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए बूंद-बूंद डीजल को तरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कोतबा के ‘OM फ्यूल्स’ (इंडियन ऑयल) पेट्रोल पंप पर अन्नदाताओं के हक पर डाका डालने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। नगर के इस पंप पर पिछले चार दिनों से पर्याप्त मात्रा में डीजल का भंडारण होने के बावजूद स्थानीय किसानों को एक-एक लीटर तेल के लिए भी भटकाया जा रहा था, जबकि रात के अंधेरे में मोटी रकम लेकर व्यापारियों को अवैध रूप से भारी मात्रा में डीजल की सप्लाई की जा रही थी।
इस गोरखधंधे का पर्दाफाश तब हुआ जब रात के 10 से 12 बजे के बीच हो रही इस अवैध सप्लाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होते ही किसानों और आम जनता में भारी आक्रोश फैल गया। खुद को फंसता देख और प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए पंप प्रबंधन ने आनन-फानन में मंगलवार को प्रति ट्रैक्टर केवल 500 रुपये का सीमित डीजल बांटकर खानापूर्ति करने की कोशिश की।
*नोजल खराबी का बहाना और ₹50 प्रति लीटर का अवैध मुनाफा..!*
स्थानीय किसानों और खेती-किसानी से जुड़े ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि बीते शुक्रवार को OM फ्यूल्स’ में डीजल का भारी स्टॉक आया था। लेकिन उस दिन के बाद से ही पंप संचालक और वहां के कर्मचारियों ने ‘डीजल खत्म है’ या ‘नोजल खराब है’ जैसे घिसे-पिटे बहाने बनाकर किसानों को गुमराह करना शुरू कर दिया।
सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, इस किल्लत के बीच पंप संचालक आपदा में अवसर तलाश रहे हैं। दिन में किसानों को खाली हाथ लौटाने के बाद, रात में इसी डीजल को कालाबाजारी के जरिए व्यापारियों को 140 से 150 रुपये प्रति लीटर की दर पर बेचा जा रहा है। इस अवैध खेल में पंप संचालक को 40 से 50 रुपये प्रति लीटर का सीधा और मोटा मुनाफा मिल रहा है, जिससे वे अपनी जेबें गर्म कर रहे हैं। जबकि जिन किसानों की धान की फसलें खेतों में परिपक्व हैं, उन्हें दुत्कार दिया गया।
*मालिक का आदेश है”– सवालों से बचते दिखे कर्मचारी, CCTV फुटेज से खुलेगा राज…!*
जब इस मामले को लेकर मीडिया की टीम ने मौके पर पहुंचकर पंप के कर्मचारियों से सीधे सवाल किया कि ‘चार दिनों से स्टॉक होने के बाद भी किसानों को डीजल क्यों नहीं दिया गया?’, तो कर्मचारियों ने कैमरे और सवालों से बचते हुए सारा ठीकरा ऊपर फोड़ दिया। कर्मचारियों का साफ कहना था कि वे केवल पंप संचालक के आदेशों का पालन कर रहे हैं, जैसा उन्हें बोला गया वैसा उन्होंने किया।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और किसानों ने अब जिला प्रशासन से मांग की है कि स्टॉक की जांच हो:
पिछले शुक्रवार को कितने लीटर डीजल का भंडारण हुआ था और आज (मंगलवार) तक कागजों में कितनी बिक्री दिखाई गई है, इसका मिलान किया जाए।
CCTV खंगाला जाए: पंप पर लगे मुख्य सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के पिछले चार दिनों के फुटेज की बारीकी से फॉरेंसिक जांच हो, जिससे रात के अंधेरे में डीजल ले जा रहे वाहनों और कालाबाजारी की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
इस गंभीर मामले में पंप संचालक अमित जायसवाल का पक्ष जानने के लिए उनके दूरभाष नंबर पर बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
सवाल यह उठता है कि अन्नदाता जिसके दम पर देश का पेट पलता है, उसे अपने ही हक के ईंधन के लिए इस तरह गिड़गिड़ाना क्यों पड़ रहा है? क्या चंद रुपयों के लालच में बैठे ऐसे पंप संचालकों पर प्रशासन इतनी सख्त कार्रवाई करेगा जो आगे के लिए नजीर बने?
*ऋतुराज बिसेन (अनुविभागीय अधिकारी राजस्व – SDM, पत्थलगांव)*
यह पूरी तरह से अवैधानिक और नियमों के खिलाफ है। शासन के कड़े नियमों का पालन न करना पंप संचालक की मनमानी और तानाशाही को दर्शाता है। मामला बेहद गंभीर है, मैं तुरंत खाद्य विभाग और संबंधित अधिकारियों की टीम को जांच के लिए मौके पर भेज रहा हूँ। जांच में यदि कालाबाजारी और अनियमितता की पुष्टि होती है, तो पंप संचालक के खिलाफ एफआईआर (FIR) सहित लाइसेंस निरस्तीकरण की कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”










