*एक महीने के लिए मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक। ज्योतिषाचार्य डॉ. राकेश शुक्ल*
पंचांग की गणना के अनुसार 15 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 20 मिनट पर सूर्य वृश्चिक राशि को छोडकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर सूर्य उत्तरायण होने के बाद एक बार फिर शहनाई की गूंज सुनाई देगी।
ज्योतिषाचार्य डॉ. राकेश शुक्ल ने बताया कि भारतीय ज्योतिष शास्त्र की मान्यता के अनुसार ग्रहों के राजा सूर्य एक माह में राशि परिवर्तन कर लेते हैं। इसी का परिणाम है कि एक साल में सूर्य का सभी बारह राशि में गोचर का अनुक्रम बन जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहा जाता है। सूर्य 15 दिसंबर को वृश्चिक राशि को छोड़कर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। इसे सूर्य की धनु संक्रांति कहा जाता है। आम बोलचाल में इसे मलमास, खरमास भी कहा जाता है। बृहस्पति हैं धनु राशि के स्वामीः सूर्य की धनु संक्रान्ति विशेष मानी जाती है क्योंकि धनु राशि के स्वामी बृहस्पति और सूर्य का बृहस्पति से सम संबंध है। दोनों की साक्षी में धर्म से जुड़े सभी वैदिक कार्य उत्तम फलदायी माने गए हैं। इसलिए धनुर्मास में एक माह 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक भगवत पारायण, व्रत एवं उपवास आदि धार्मिक कार्य किए जा सकते हैं। इससे भक्त को रोग, दोष, ताप से मुक्ति मिलती है तथा भाग्य में आने वाले अवरोध समाप्त होते हैं। पराक्रम प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है, आत्मविश्वास प्रबल होता है और पूर्व के ज्ञात अज्ञात दोषों से निवृत्ति होती है। पौराणिक मान्यता यह कहती है कि धनुर्मास में अधिक से अधिक धर्म और आध्यात्म के कार्य करना चाहिए जिससे आत्म उत्थान के साथ-साथ धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है। धनुर्मास में की गई देव आराधना प्रशासनिक व राजनीतिक क्षेत्र में इच्छित सफलता प्रदान करती है। इस माह में 12 ज्योतिर्लिंग की यात्रा का विशिष्ट लाभ प्रदान करती है।










