झीरम शहीदों पर अभद्र टिप्पणी के खिलाफ कांग्रेस का कड़ा रुख, पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन, मांग की तत्काल गिरफ्तारी

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झीरम शहीदों पर अभद्र टिप्पणी के खिलाफ कांग्रेस का कड़ा रुख, पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन, मांग की तत्काल गिरफ्तारी

जशपुर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा झीरम घाटी के शहीदों को नमन करने के सोशल मीडिया पोस्ट पर कांसाबेल निवासी भाजपा नेता सुभाष चंद्र गुप्ता द्वारा की गई अभद्र टिप्पणी ने एक गंभीर विवाद को जन्म दिया है। इस घटना के विरोध में कांग्रेस ने त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह को एक ज्ञापन सौंपा है।
कांग्रेस नेताओं ने इस टिप्पणी को न केवल शहीदों की शहादत का अपमान, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक मर्यादा और शांति व्यवस्था पर सीधा हमला करार दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सुभाष चंद्र गुप्ता सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियां करने का इतिहास रखते हैं और पूर्व में इसी तरह की घटनाओं के लिए उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी। फिर भी, उनकी दोहराई गई कार्रवाई निंदनीय और असहनीय है।
कांग्रेस नेताओं, जिसमें जिला अध्यक्ष मनोज सागर यादव, पूर्व विधायक यू. डी. मिंज, विनय भगत, डीडीसी आरती सिंह, अनोज गुप्ता, महेंद्र अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल, हंसराज अग्रवाल, कुलवंत सिंह भाटिया सहित अनेक वरिष्ठ नेता शामिल थे, ने पुलिस अधीक्षक से मांग की कि सुभाष चंद्र गुप्ता के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए और उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। इससे पहले, कांग्रेस नेताओं ने थाना प्रभारी कुनकुरी, पत्थलगांव, जशपुर और कांसाबेल में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें सोशल मीडिया पर की गई अभद्र टिप्पणियों के साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे।
कांग्रेस नेताओं ने जोर देकर कहा कि यह मामला किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की सामूहविक चेतना और शहीदों के सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी आंदोलन को और तेज करेगी। नेताओं ने जोर दिया कि गाली-गलौज, फर्जी खबरें और अपमानजनक टिप्पणियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनोज सागर यादव ने कहा, “झीरम शहीदों की शहादत को अपमानित करना न केवल हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि समाज में द्वेष और अशांति फैलाने का प्रयास है। हम पुलिस से अपील करते हैं कि वे इस मामले में तत्काल कदम उठाएं, अन्यथा यह लड़ाई सड़कों तक ले जाई जाएगी।”
पूर्व विधायक यू. डी. मिंज ने जोड़ा, “सोशल मीडिया एक जिम्मेदारी का मंच है, न कि अपमान और उत्तेजना फैलाने का। हमारी मांग है कि दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।”
कानूनी और सामाजिक आयाम:
यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A (सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश) और धारा 509 (स्त्री की गरिमा को ठेस पहुंचाना) के तहत अपराध के दायरे में आता है। साथ ही, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की प्रासंगिक धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। इस तरह की टिप्पणियां समाज में उग्र प्रतिक्रिया और अशांति को जन्म दे सकती हैं, जिससे लोकतंत्र और शांति व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
कांग्रेस ने पुलिस से आग्रह किया कि वे साइबर सेल के माध्यम से आरोपी की पहचान सुनिश्चित करें, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटवाएं और इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनाएं।

Pathik Jan News
Author: Pathik Jan News

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