श्रीराम कथा में भावविभोर हुए श्रोता, गूंजे जयघोष — पटनायक बोले, “जशपुर की धरती रत्नगर्भा है”*

जशपुरनगर। जशपुर की पुण्यभूमि पर रविवार को एक दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत वातावरण में सम्पन्न हुआ। आयोजन स्थल वृन्दावन इम्पीरियल होटल में जैसे ही श्रीराम के जयकारे गूंजे, समस्त वातावरण भक्तिरस में डूब गया।
*गोकुलानंद पटनायक की ओजस्वी वाणी ने बांधा समां*
प्रख्यात रामकथा वाचक श्री गोकुलानंद पटनायक ने भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर वनवास, सीता हरण और लंका विजय तक की कथा अत्यंत भावप्रवण शैली में प्रस्तुत की। कथा के दौरान जब उन्होंने शबरी का समर्पण, हनुमान जी की भक्ति, और राम-रावण युद्ध का वर्णन किया, तो श्रोता भावविभोर होकर भावनाओं की गहराइयों में उतर गए।
*जशपुर को बताया रत्नगर्भा भूमि*
कथा के मध्य श्री पटनायक ने जशपुर की सराहना करते हुए कहा — “यह रत्नगर्भा भूमि है, जिसने न केवल धार्मिक चेतना को जीवित रखा बल्कि महान विभूतियों को जन्म दिया है।” उन्होंने स्व. कुमार दिलीप सिंह जूदेव को युगपुरुष बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि “उन्होंने धर्म, संस्कृति और वनवासी कल्याण के लिए अनुकरणीय कार्य किए।”
*रुद्राक्ष वृक्षारोपण से जुड़ी भावनाएं*
आयोजन की स्मृति में स्वर्गीय रामचंद्र मिश्र ‘पौराणिक’ की स्मृति में दो रुद्राक्ष पौधों का रोपण किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि के रूप में स्वीकार किया।
*गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति*
कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष कुमार शौर्य प्रताप सिंह जूदेव बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। आयोजन को सफल बनाने में केदार मिश्रा की सराहनीय भूमिका रही। बड़ी संख्या में संतगण, महिलाएं व स्थानीय श्रद्धालु कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
*रामकथा बनी आध्यात्मिक यात्रा*
यह श्रीरामकथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवनदायिनी प्रेरणा बन गई। श्रद्धालुओं ने आयोजन को जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव बताया, जिसने उनके मन-मंदिर में श्रीराम की भक्ति का दीप जला दिया।










