गुरू का स्थान ईश्वर से भी उंचा होता है, गुरू के ज्ञान से ही जीवन में मिलती है सफलता: कौशल्या साय,

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गुरू का स्थान ईश्वर से भी उंचा होता है, गुरू के ज्ञान से ही जीवन में मिलती है सफलता: कौशल्या साय,

बगिया एवं बंदरचुवा हाईस्कूल में उत्साह पूर्वक मनाया गया गुरूपूर्णिमा उत्सव

फरसाबहार। सोमवार को बगिया एवं बंदरचुवा के शासकीय हाई सेकेण्डरी स्कूल में गुरू पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी कौशल्या साय थी। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंची मुख्य अतिथि का स्कूल के छात्रों और शिक्षकों ने पुष्प माला देकर भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माता सरस्वती की पूजा से हुई।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी पीके भटनागर ने कहा कि गुरू का सम्मान करना भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। गुरू के बीना कोई भी व्यक्ति ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकता। ईश्वर के अस्तित्व और उसे प्राप्त करने के मार्ग का ज्ञान गुरू से ही प्राप्त होता है।

मुख्य अतिथि कौशल्या साय ने कार्यक्रम में शामिल छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि गुरू का स्थान ईश्वर से भी उंचा होता है। जहां गुरू का सम्मान नहीं होता है,वहां ईश्वर का वास कदापि नहीं हो सकता। उन्होनें कहा कि छात्र जीवन में अनुशासन बहुत आवश्यक होता है। जब तक छात्र अनुशासित नहीं होगा,वह जीवन में सफल नहीं हो सकता। यहीं कारण है कि शिक्षक सबसे पहले स्कूल में समय पर स्कूल आने, गृह कार्य करने और निर्धारित समय में छुट्टी कर,छात्र को घर भेजते हैं। छात्र जीवन में मिली अनुशासन का यह सबक हमारी सफलता की पहली सीढ़ी का काम करता है। गुरू पूर्णिमा का पर्व हमें गुरू की महत्ता और जीवन में उनकी भूमिका का स्मरण कराता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं भी गुरू पूर्णिमा के दिन बनोरा आश्रम पहुंच कर अपने गुरू का आर्शिवाद लिया। कार्यक्रम में अतिथियों ने स्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षकों का साल और श्रीफल देकर सम्मानित किया। संस्था के प्राचार्य दिनेश शर्मा द्वारा अतिथियों का आभार व्यक्त करने के साथ ही कार्यक्रम संपन्न हुआ।

Pathik Jan News
Author: Pathik Jan News

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