पति की नृशंस हत्या कर शव को सूटकेस में छिपाने वाली पत्नी को आजीवन कारावास*

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*पति की नृशंस हत्या कर शव को सूटकेस में छिपाने वाली पत्नी को आजीवन कारावास*

*द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन कुनकुरी ने सुनाया कठोर फैसला, कहा— ऐसे जघन्य अपराध में किसी भी प्रकार की नरमी स्वीकार्य नहीं*

जशपुर जिले के बहुचर्चित संतोष भगत हत्याकांड में न्यायालय ने ऐतिहासिक एवं कठोर निर्णय सुनाते हुए आरोपी पत्नी मंगरीता भगत (उम्र 45 वर्ष) को अपने पति की नृशंस हत्या करने तथा साक्ष्य मिटाने का दोषी पाते हुए सश्रम आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है।
विदित हो कि 07 नवम्बर 2025 की रात्रि थाना दुलदुला क्षेत्रांतर्गत ग्राम भिंजपुर में घरेलू विवाद के दौरान आरोपी पत्नी ने रसोई में रखे , सील-पत्थर से पति संतोष भगत के सिर एवं कान के समीप कई प्राणघातक वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। हत्या के बाद आरोपी ने फर्श पर फैले रक्त के धब्बों को साफ किया तथा शव को मोड़कर एक बड़े ट्रॉली सूटकेस में ठूंसकर छिपा दिया, ताकि अपराध के साक्ष्य नष्ट किए जा सकें।
दिनांक 09 नवम्बर 2025 को मृतक की पुत्री एवं परिजनों द्वारा घर का ताला खोलने पर सूटकेस के भीतर शव मिलने से पूरे मामले का खुलासा हुआ। सूचना मिलने पर थाना दुलदुला पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से विवेचना प्रारंभ की।
प्रकरण की विवेचना के दौरान निरीक्षक कृष्ण कुमार साहू द्वारा नवीन आपराधिक कानूनों के अनुरूप ई-साक्ष्य ऐप के माध्यम से डिजिटल साक्ष्य संकलित किए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय अभिमत, एफएसएल रिपोर्ट, मेमोरेंडम, जप्ती एवं अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों ने आरोपी के विरुद्ध अपराध को पूरी तरह सिद्ध किया। एफएसएल जांच में सूटकेस, सील-पत्थर, आरोपी के कपड़ों एवं अन्य जप्त वस्तुओं पर मानव रक्त पाए जाने की पुष्टि हुई।
न्यायालय में अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत एवं तार्किक श्रृंखला प्रस्तुत करते हुए यह सिद्ध किया कि घटना केवल आरोपी द्वारा ही कारित की गई है। अभियोजन की प्रभावी पैरवी से सहमत होते हुए द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन, कुनकुरी ने आरोपी को दोषसिद्ध ठहराया।
निर्णय में न्यायालय ने कहा कि अपने ही पति की नृशंस हत्या कर शव को सूटकेस में छिपाने का प्रयास केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि समाज में मानवीय संवेदनाओं एवं पारिवारिक मूल्यों के क्षरण का गंभीर उदाहरण है। ऐसे जघन्य अपराध में किसी भी प्रकार की नरमी न्याय एवं समाज दोनों के हित में स्वीकार्य नहीं है।
*न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा*
धारा 103(1) भारतीय न्याय संहिता (BNS) – सश्रम आजीवन कारावास एवं ₹1,000 अर्थदंड।
धारा 238(क) भारतीय न्याय संहिता (BNS) – 03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹500 अर्थदंड।
*जशपुर पुलिस गंभीर अपराधों की निष्पक्ष, वैज्ञानिक एवं प्रभावी विवेचना कर दोषियों को न्यायालय से कठोर दंड दिलाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध है।*

Pathik Jan News
Author: Pathik Jan News

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