*अब घटनास्थल पर ही होगी वैज्ञानिक जांच : जशपुर पुलिस को मिली अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन*
*65 लाख की “चलित फॉरेंसिक प्रयोगशाला” से हत्या, साइबर अपराध, नारकोटिक्स व गंभीर मामलों की जांच होगी तेज और सटीक*
जशपुर पुलिस को अपराध जांच प्रणाली को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में बड़ी सौगात मिली है। छत्तीसगढ़ शासन एवं छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा जिले को अत्याधुनिक मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध कराई गई है। रक्षित केंद्र जशपुर में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर इस वैन को रवाना किया।
इस अवसर पर विधायक रायमुनी भगत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह सहित कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि और पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।
डीआईजी एवं एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने बताया कि नई आपराधिक कानून व्यवस्था के तहत वैज्ञानिक जांच को विशेष महत्व दिया गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के अनुसार 7 वर्ष या उससे अधिक सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य संग्रह अनिवार्य किया गया है। इसी उद्देश्य से “लैब ऑन व्हील्स” के रूप में तैयार यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन जिले को प्रदान की गई है।
उन्होंने बताया कि अब घटनास्थल पर ही प्रारंभिक वैज्ञानिक जांच, साक्ष्य संग्रह और विश्लेषण किया जा सकेगा, जिससे साक्ष्यों के नष्ट होने या दूषित होने की संभावना कम होगी और जांच अधिक पारदर्शी व प्रभावी बनेगी।
वैन में फिंगरप्रिंट एवं फुटप्रिंट जांच किट, डीएनए एवं ब्लड सैंपल कलेक्शन किट, डिजिटल फॉरेंसिक उपकरण, सीसीटीवी एवं मोबाइल डेटा विश्लेषण सुविधा, बैलिस्टिक जांच किट, गन शॉट रेजिड्यू जांच किट, हाई इंटेंसिटी लाइट, डीएसएलआर कैमरा, वीडियोग्राफी उपकरण तथा साक्ष्य संरक्षण की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
विधायक रायमुनी भगत ने कहा कि सरकार पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है ताकि अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण हो और पीड़ितों को त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जांच प्रणाली से जहां अपराधियों की पहचान आसान होगी, वहीं निर्दोष लोगों को भी संरक्षण मिलेगा।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव ने इसे न्याय व्यवस्था को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। वहीं नगरपालिका अध्यक्ष अरविंद भगत ने कहा कि आधुनिक तकनीक से अपराधियों की पहचान और दोषसिद्धि सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
फॉरेंसिक वैज्ञानिक अधिकारी सलीम कुजूर ने बताया कि पहले साक्ष्यों को जांच के लिए बाहर भेजना पड़ता था, जिससे समय लगता था और साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका रहती थी। अब घटनास्थल पर ही जांच संभव होने से रिपोर्टिंग तेज, सटीक और प्रभावी होगी।
उन्होंने कहा कि यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन “विज्ञान की शक्ति से सशक्त जांच और त्वरित न्याय” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।









